पुतलों की आग, नारों का शोर… क्या इससे बदलेगा बुधनी विधानसभा का राजनीतिक गणित..?

 पुतला दहन से राजनीति तक: बुधनी विधानसभा में कांग्रेस की अग्निपरीक्षा...


ये तस्वीरें देखने में तो बस पुतला-दहन और नारेबाज़ी की लगती हैं, लेकिन ज़रा ठहरकर देखो तो समझ आएगा—ये अपने ही कुनबे को समेटने की जद्दोजहद की तस्वीरें हैं।

मध्यप्रदेश की बुधनी विधानसभा के भैरूंदा और लाड़कुई की ये झलकियाँ यूँ ही नहीं हैं। यही वो इलाका है जहाँ शिवराज सिंह चौहान ने करीब 18 साल सत्ता की सवारी की, और जहाँ सत्ता की राजनीति बरसों से एक ही रंग में रंगी रही।

पर वक्त बदलता है, चेहरे बदलते हैं। अब प्रदेश की बागडोर मोहन यादव के हाथ में है और इसी बदलाव के साथ भैरूंदा-लाड़कुई की सियासत में भी हलचल दिखने लगी है। कांग्रेस के लिए ये इलाका अब सिर्फ “परंपरागत किला” नहीं रहा, बल्कि खुद को दोबारा गढ़ने की प्रयोगशाला बनता दिख रहा है।


मुद्दों का मेला या रणनीति की शुरुआत?

कफ सिरप से मौत, दूषित पानी, महिलाओं-सेना पर बयान—एक साथ इतने मुद्दे मिल जाएँ तो विपक्ष की आँखों में चमक आना लाज़मी है। पुतलों की आग में दरअसल कांग्रेस ये परख रही है कि कितनी देर तक कार्यकर्ता गरम रहेंगे और कितनी दूर तक संगठन चलेगा।

देसी कहावत में कहें तो—“मुद्दा मिल गया है, अब देखो ऊँट कितनी दूर चलता है।”

एकजुटता की कोशिश, पर नसीहत भी

भैरूंदा और लाड़कुई में एक साथ प्रदर्शन ये बताता है कि कांग्रेस अब समझ रही है—अकेले-अकेले लड़ोगे तो हार पक्की, साथ चलोगे तो बात बनेगी।

तारीफ़ इस बात की कि कार्यकर्ता मैदान में उतरे, चेहरे दिखे, आवाज़ बनी।

नसीहत ये कि सिर्फ पुतला जलाने से बात नहीं बनेगी—गाँव-गली, पानी-नाली, स्कूल-अस्पताल तक मुद्दा ले जाना होगा। वरना ये जोश भी अख़बार की स्याही की तरह सूख जाएगा।


सत्ता का गणित और चुनाव की तैयारी

सत्ता किसके हाथ जाएगी, ये तो समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि अगर कांग्रेस इन मुद्दों को रणनीति में ढाल पाई, संगठन को ज़मीन पर खड़ा कर पाई और सिर्फ व्यंग नहीं, विश्वास पैदा कर पाई—तो आने वाले मध्यप्रदेश के चुनाव में ये तस्वीरें याद दिलाई जाएँगी कि यहीं से कुछ बदला था।

आख़िर में देसी अंदाज़ में इतना ही—

मुद्दे संजीवनी बनें या नहीं, ये कांग्रेस के हाथ में है। दवा सही मात्रा में दी तो मरीज़ उठेगा, नहीं तो इतिहास फिर वही—तस्वीरें रहेंगी, सत्ता कोई और ले जाएगा।


Written by

Journalist Satyendra

Independent Journalist | Madhya Pradesh Politics | Ground Reports & Analysis

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