कलयुगी माँ की खौफनाक साजिश: प्रेमी के साथ मिलकर 9 साल की मासूम की हत्या, रेहटी पुलिस ने खोला पूरा सच

 जिस गोद में सबसे सुरक्षित थी मासूम, उसी गोद ने छीन ली सांसें


इस तस्वीर में पुलिसकर्मी और उनके सामने बैठे आरोपी दिखाई दे रहे हैं। आमतौर पर ऐसी तस्वीरें पुलिस की कार्रवाई के बाद सामने आती हैं और हम-आप इन्हें खबरों में अक्सर देखते भी हैं। ज़्यादातर मामलों में यह एक सामान्य औपचारिक तस्वीर लगती है—लेकिन यह तस्वीर वैसी नहीं है। यह फोटो अपने आप में बहुत कुछ समेटे हुए है। जमीन पर बैठे ये आरोपी सिर्फ कानून के सामने झुके लोग नहीं हैं, बल्कि उस कहानी का चेहरा हैं, जिसने माँ-बेटी के रिश्ते को शर्मसार कर दिया।

कहते हैं माँ भगवान का दूसरा रूप होती है। उसकी गोद में बच्चा सबसे महफूज़ होता है। लेकिन जब वही माँ अपने स्वार्थ, अपने प्रेम-प्रसंग और अवैध संबंधों के आगे ममता को कुचल दे—तो समझ लीजिए यह सिर्फ अपराध नहीं, कलयुग की सबसे डरावनी तस्वीर है। जिस माँ के स्पर्श से बच्ची को सुकून मिलना था, उसी माँ की साजिश में 9 साल की मासूम की जिंदगी खत्म कर दी गई। बाहर से रोती-बिलखती माँ, भीतर से खामोश साजिशकर्ता—यही इस क्राइम स्टोरी का सबसे खौफनाक सच है।

अस्पताल से पोस्टमार्टम तक....

दिनांक 17 फरवरी 2026, दोपहर करीब 01 बजे। ग्राम बाबरी की 9 वर्षीय राधिका यदुवंशी को अचेत हालत में परिजन भैरूंदा के भारती हॉस्पिटल लेकर पहुँचे। डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया—बच्ची की सांसें पहले ही थम चुकी थीं। खबर फैलते ही हड़कंप मच गया। सूचना पुलिस को दी गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए सिविल हॉस्पिटल भेजा गया। रेहटी से महिला डॉक्टर को बुलाकर पोस्टमार्टम कराया गया और आगे की कानूनी कार्यवाही शुरू हुई।

चूंकि ग्राम बाबरी रेहटी थाना क्षेत्र में आता है, इसलिए जांच रेहटी पुलिस को सौंपी गई। इस पूरे दौरान बच्ची की माँ सुषमा हर कदम पर साथ रही—कभी अस्पताल में, कभी पोस्टमार्टम हाउस के बाहर। किसी को उस पर शक तक नहीं हुआ। माँ पर शक करना आसान भी नहीं होता।


सस्पेंस टूटा, सच सामने आया

पुलिस ने जब घटनास्थल, समय और बयानों को जोड़ना शुरू किया, तो कई बातें खटकने लगीं। कड़ाई से पूछताछ हुई। धीरे-धीरे सस्पेंस टूटा और जो सच सामने आया, उसने हर किसी को सन्न कर दिया। पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि सुषमा यदुवंशी और राहुल यदुवंशी के बीच लंबे समय से प्रेम-प्रसंग और अवैध संबंध थे। दोनों की मुलाकातों में मासूम राधिका बाधा बन रही थी।

साजिश और हत्या

जांच के अनुसार साजिश पहले से रची गई थी। माँ मजदूरी पर जाने का बहाना बनाकर घर से निकली। तय वक्त पर प्रेमी घर में दाखिल हुआ। घर में अकेली बच्ची थी—और कुछ ही पलों में उसकी जिंदगी खत्म कर दी गई। जिस माँ की जिम्मेदारी थी बेटी को पाल-पोसकर दुनिया दिखाने की, उसी माँ ने अपने मोह में आकर उसकी सांसें छीन लीं।

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी

पुलिस की सख्त पूछताछ में आरोपी टूटे और सारा सच कबूल कर लिया। इसके बाद माँ और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। कानून ने अपना काम कर दिया, लेकिन इंसानियत हार गई।

यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं है। यह उस समाज का आईना है, जहाँ रिश्ते बोझ बनते जा रहे हैं और ममता, स्वार्थ के आगे हार रही है। गांव की हर गली, हर चौपाल पर आज एक ही सवाल तैर रहा है—

अगर माँ ही कलयुगी बन जाए, तो मासूम आखिर जाए तो जाए कहाँ?

—Journalist Satyendra

Independent Journalist | Crime & Ground Report

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